अच्छी पर्सनालिटी डेवलपमेंट कैसे करें? | personality development tips in hindi

अच्छी शख्सियत या पर्सनालिटी डेवलपमेंट करने के तरीके (STEPS TO BUILDING A POSITIVE PERSONALITY DEVELOPMENT TIPS IN HINDI)


पर्सनालिटी डेवलपमेंट कैसे करें?

1. जिम्मेदारी स्वीकार करें (Accept responsibility)

जब लोग अतिरिक्त जिम्मेदारियों को स्वीकार करते हैं, तो दरअसल वे अपनी सफलता का दरवाज़ा खोल रहे होते हैं।


जवाबदेही को स्वीकार करना ही जिम्मेदार व्यवहार है और यह उसकी समझदारी और परिपक्वता (maturity) को दिखाता है।


जिम्मेदारी कबूल करने की भावना हमारे नज़रिए और उस माहौल की छवि होती है, जिसमें हम काम करते हैं। ज्यादातर लोग कुछ अच्छा होने पर तुरंत श्रेय (credit) ले लेते हैं, मगर बहुत कम लोग ऐसे हैं जो गलती होने पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।


अगर एक व्यक्ति जिम्मेदारियों को स्वीकार नहीं करता, तो उनसे उसे छुटकारा नहीं मिलता है, इसलिए आपका मक़सद ज़िम्मेदार व्यवहार का विकास होना चाहिए।


2. औरों की परवाह (care about others)

अगर हम सब एक-दूसरे के लिए छोटे बच्चे की तरह सोचें, तो यह दुनिया कितनी हसीन हो जाएगी। दूसरों को खयाल करें और नम्रता व शिष्टता दिखाएँ। दूसरों का ख़याल रखना यह दिखाता है कि हम उनकी परवाह करते हैं।


3. अपने शब्दों को सावधानी से चुनें (Choose Your Words Carefully)

जो मन में आए, वही बोलने से आदमी को बाद में वह सुनना पड़ता है, जो उसे पसंद नहीं होता। व्यवहार में चतुर बनें।


व्यवहार में चतुर होने का मतलब है कि हम अपने शब्दों का चुनाव समझदारी और होशियारी से करें, और जाने कि हम कितनी दूर तक जा सकते हैं।


इसका मतलब यह जानना भी है कि क्या कहना है, और क्या नहीं कहना है? व्यवहार कुशलता के बिना प्रतिभा हमेशा काम नहीं आ सकती।


शब्दों से हमारा नजरिया झलकता है। शब्द हमारी भावनाओं को चोट पहुँचा सकते हैं और हमारे रिश्तों को तोड़ सकते हैं। लोगों को इतनी चोट तो कुदरत की मचाई तबाही से भी नहीं पहुँचती, जितनी कि गाली गलौज या कठोर शब्दों से पहुँचत्ती है। सोच के बोलें, न कि बोल के सोचें।


4. आलोचना और शिकायत न करें (Don't Criticise and Complain)

हमारा मतलब नकारात्मक आलोचना से है। हम आलोचना क्यों न करें? जब किसी की बुराई की जाती है तो उसका रवैया खुद को बचाने का हो जाता है। एक आलोचक एक ड्राइवर को पागल बना देने वाले वैकसीट (back seat) ड्राइवर की तरह होता है। क्या इसका मतलब है कि हमें कभी आलोचना नहीं करनी चाहिए, या हम सही आलोचना कर सकते हैं?


सही आलोचना (Positive Criticism)


रचनात्मक (constructive) आलोचना कैसे दी जा सकती है? नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि मदद करने के इरादे से आलोचना कीजिए। आलोचना करते समय हल पेश करना भी जरूरी है। व्यवहार की आलोचना करें, न कि व्यक्ति की, क्योंकि जब हम व्यक्ति की आलोचना करते हैं, तो उसके स्वाभिमान को ठेस पहुँचाते हैं।


सहायता करने की इच्छा होने पर ही आलोचना करने का हक़ मिलता है। अगर आलोचना करने में आलोचक को आनंद नहीं मिल रहा है, तो उसे आलोचना करने का हक़ है, लेकिन उसे आलोचना करने में मज़ा आने लगे, तो आलोचना रोक देनी चाहिए।


आलोचना स्वीकार करना (Receiving Criticism)


हो सकता है कि हमारी आलोचना कभी सही, और कभी गलत ढंग से की जाती हो। दुनिया में महान लोगों की भी आलोचना हुई है। सही आलोचना फायदेमंद हो सकती है, और इसे एक अच्छी सलाह के रूप में क़बूल करना चाहिए।


नाजायज़ आलोचना असल में छिपी हुई तारीफ है। आम लोग जीतने वालों को पसंद नहीं करते। लोग जब सफल नहीं होते, और उनके पास बातचीत करने के लिए कोई मुद्दा नहीं होता, तो वे सफल लोगों को निशाना बनाते हैं।


आलोचना से हमेशा बचे रहने का केवल एक ही तरीका है कि हम न तो कुछ करें, न कहें और न ही अपने पास कुछ रखें, लेकिन इस तरह हम आख़िर में एक नकारा इंसान बन जाएँगे।


गलत आलोचना इन दो वजहों से की जाती है


1. अज्ञानता जब आलोचना अज्ञानता की वजह से की जाती है, तो सही जानकारी देकर उसे आसानी से सुधारा या बंद कराया जा सकता है।


2. जलन जब आलोचना जलन की वजह से होती है तो इसे छिपी हुई तारीफ़ के रूप में स्वीकार करें। हमारी गलत आलोचना इसलिए हो रही है कि आलोचक हमारी जगह खुद को देखना चाहता है, लेकिन वहाँ न हो सकने की वजह से वह तारीफ़ की जगह आपकी आलोचना करता है। जिस पेड़ पर सबसे ज्यादा फल लगते हैं, उसी पर सबसे ज्यादा पत्थर मारे जाते हैं।


5. मुस्कराएँ और दयालु बनें (Smile and Be Kind)

खुशमिज़ाजी अच्छाई से पैदा होती है। मुस्कान बनावटी भी हो सकती है, और सच्ची भी। मुद्दे की बात यह है कि मुस्कान असली हो। त्योरियाँ चढ़ाने में मुस्कराने से ज्यादा माँसपेशियाँ खिंचती हैं, इसलिए त्योरियाँ चढ़ाने से अधिक आसान है।


इससे सूरत निखरती है। एक चिड़चिड़े इंसान के साथ कोन रहना चाहेगा? कोई नहीं, सिवाए उससे भी बड़े चिड़चिड़े के। हम मुस्कराते हैं, तो दूसरे लोग भी मुस्कराते हैं। इससे हमारा चेहरा बिना कुछ खर्च किए ही खिल जाता है। हँसते हुए नूरानी चेहरे को हमेशा पसंद किया जाता है।


6. दूसरों के व्यवहार का सही अर्थ निकालें (Put Positive Interpretation on Other People's Behaviour)

पूरी जानकारी नहीं होने की वजह से लोग आदतन दूसरों द्वारा किए गए या नहीं किए गए काम का गलत अर्थ लगाते हैं। कुछ लोग एक भ्रम के शिकार हैं। वे समझते हैं कि दुनिया उनके ख़िलाफ़ है, और उनके पीछे पड़ी हुई है। मगर ऐसा नहीं है।


सोच सकारात्मक होने से हमें शख्सियत को आकर्षक बनाने का अच्छा मौका मिलता है, जिससे हमारे रिश्ते बेहतर बनते हैं।


7. अच्छे श्रोता बनें (Be a Good Listener)

हम लोगों को अकसर कहते सुनेंगे कि बातचीत की कला मर रही है, लेकिन क्या हमको नहीं लगता कि अच्छा श्रोता मिलना काफी मुश्किल है। वास्तव में एक अच्छा श्रोता काफ़ी मूल्यवान होता है।


हमारे सुनने के ढंग से पता चलता है कि हम कितनी परवाह करते है। हम जब दुसरे व्यक्ति के प्रति ख्याल रखने वाला नजरिया दिखलाते हैं, तो वह व्यक्ति खुद से महत्वपूर्ण महसूस करता है। जब वह महत्त्वपूर्ण महसूस करता है, तो क्या होता उसका हौसला बढ़ जाता है, और वह हमारी बातें सुनने के लिए और भी अच्छी तरह तैयार होता है।


एक अच्छा श्रोता बनने के लिए-


  • दूसरे को बोलने के लिए उत्साहित करें।
  • सवाल पूछे। यह हमारी दिलचस्पी को दिखाता है।
  • वक्ता के बोलते समय रुकावट न डालें।
  • विषय न बदलें।
  • सम्मान और समझ का भाव दिखाएँ।
  • ध्यान से सुनें।
  • इधर-उधर ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से बचें।
  • अपने आपको दूसरे के स्थान पर रख कर देखें।
  • खुले विचारों वाला बनें। अपनी पहले से बनी धारणाओं और राय को अपने सुनने में बाधा न बनने दें।
  • संदेश पर ध्यान दें न कि कहने के सलीके पर।
  • शारीरिक हरकतों की भाषा को पहचानें। जैसे कि चेहरे पर आने वाले भाव, नज़रों की भाषा। हो सकता है कि ये अभिव्यक्तियाँ कोई अलग ही संदेश दे रही हों।
  • भावों को समझें, न कि सिर्फ़ शब्दों को सुनें।

8. उत्साही बनें (Be Enthusiastic)

उत्साह और सफलता साथ-साथ चलते हैं, मगर उत्साह का नंबर पहला है। उत्साह- आत्मविश्वास, आत्मबल और वफ़ादारी को बढ़ाता है। यह अमूल्य है। उत्साह एक से दूसरे में फैलता है। हम किसी व्यक्ति के बात करने, चलने और से मिलने के ढंग से उसके उत्साह को महसूस कर सकते है। उत्साह एक तरह की आदत है। इसे अपनाया जा सकता है, और इसका अभ्यास किया जा सकता है।


जब तक जिंदगी है, जिदादिली से जीएँ । मौत आने से पहले ही मुर्दा न बने। उत्साह और इच्छा साधारण व्यक्ति को असाधारण बनाती है। सिर्फ एक डिग्री के फ़र्क से पानी भाप बन जाता है, और भाप बड़े-से-बड़े इंजन को खींच सकती है। उत्साह हमारी जिंदगी के लिए वही काम करता है।


9. ईमानदारी और सच्चाई से प्रशंसा करें (Give Honest and sincere Appreciation)

क़ीमती जेवरात या महंगे गिफ्ट सच्चे उपहार नहीं हो सकता है कि कई बार ये सिर्फ कमियों को ढूंढने के लिए माफ़ी माँगने का एक ज़रिया हो सकते हैं। कई बार लोगों को पूरा समय न दे पाने की कमी को हम उपहारों से पूरा करने की कोशिश करते हैं।


असली उपहार तो हम ख़ुद को किसी के साथ बाँट के देते हैं। सच्ची तारीफ़ करना उन सबसे बड़े उपहारों में से है, जो हम किसी को दे सकते हैं। इससे दूसरा व्यक्ति खुद को महत्त्वपूर्ण समझता है। ज्यादातर लोगों में खुद को महत्त्वपूर्ण माने जाने की इच्छा काफ़ी गहरी होती है। यह इंसान के लिए एक बड़ी प्रेरणा हो सकती है।


10. जब हम कोई गलती करते हैं, तो उसे क़बूल करते हुए बढ़ें (When You Make Mistake, Accept It And Move On)

“जब मैं गलती करूँ, तो मुझमें इतनी शक्ति हो कि खुद को बदल सकूँ और जब मैं सही काम करूँ, तो मुझे इतनी शक्ति हो कि मुझमें अहंकार न आए। यह जीने की अच्छी फ़िलॉसोफी है।


कुछ लोग सीखते हुए, जीते हैं, और कुछ लोग जीते हैं लेकिन कभी सीखते ही नहीं हैं। ग़लतियों से सीखना चाहिए। ग़लती को दोहराना सबसे बड़ी गलती है।


अपनी गलती के लिए न तो किसी पर दोष लगाएँ, और न ही बहाने बनाएँ। इस पर अड़े न रहें। जब हम अपनी गलती महसूस करें, तो बहुत अच्छा होगा कि उसे स्वीकार करके माफ़ी माँगे। अपनी सफ़ाई न पेश करें। क्यों? गलती स्वीकार करने से दूसरा व्यक्ति निरुत्तर हो जाता है।


11. तर्क करें, पर तकरार न करें (Discuss But Don't Argue)

तकरार और बहस से बचा जा सकता है, और थोड़ी सावधानी बरतकर इंसान मन को बहुत सी तकलीफ़ों से बचा सकता है। किसी बहस को जीतने का सबसे अच्छा तरीका है कि उसमें पड़ा ही न जाए। बहस एक ऐसी चीज़ है जिसे जीता नहीं जा सकता, क्योंकि अगर हम जीतते हैं तो भी हारेंगे और अगर हारते हैं तो भी हारेंगे।


अगर हम एक बहस में जीतते हैं मगर एक अच्छी नौकरी, ग्राहक, दोस्त, या जीवनसाथी खो देते हैं, तो यह कैसी जीत है? बिल्कुल खोखली। बहसबाजी झूठे अहंकार से पैदा होती है।


बहस करना हारी हुई लड़ाई को लड़ने के समान है। अगर कोई जीतता भी है तो उसे हासिल होने वाली चीज़ से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। जज़्बाती लड़ाईयाँ हमारे जीत जाने के बाद भी दिलों में दर्द छोड़ जाती हैं।


बहस में दोनों व्यक्ति अपनी-अपनी बात मनवाने पर तुले होते हैं। बहसबाजी केवल अहंकार की ऐसी लड़ाई है, जिसमें एक-दूसरे पर चिल्लाने की होड़-सी लगी होती है। जो यह समझता है कि वह सब-कुछ जानता है वह तो बेवकूफ़ है ही, लेकिन उससे बड़ा बेवकूफ वह है जो उससे बहस करता है।


12. पीठ पीछे बातें न करें (Don't Gossip)

याद रखें, जो लोग हमारे सामने दूसरों की बातें करते हैं, वे हमारी पीठ पीछे हमारे बारे में भी बातें करते हैं।


गप हाँकने और झूठ बोलने के बीच करीबी रिश्ता है। एक गप्पी बातें सुनता तो जल्दबाजी में है, मगर उन्हें मजे ले-लेकर सुनाता है। वह अपने काम पर ध्यान नहीं देता, क्योंकि न तो उसके पास काम होता है, और न ही दिमाग।


गप्पी की दिलचस्पी काम की बातों से ज्यादा उड़ती ख़बरों को सुनने में होती है। गप्प मारना एक ऐसी कला है, जिसमें कुछ ख़ास कहा भी नहीं जाता, और न ही कुछ अनकहा छूटता है।


किसी ने ठीक ही कहा है, "छोटे लोग दूसरों के बारे में बातें करते हैं, मध्यम स्तर के लोग चीजों के बारे में बातें करते हैं, और महान लोग विचारों के बारे में बातें करते हैं।"


गप्प मारने से किसी के चरित्र की निंदा और बदनामी भी हो सकती है। गप्प सुनने वाले उतने ही दोषी हैं, जितने कि गप्प मारने वाले। गप्प हाँकने वाला अक्सर अपनी ही बातों के जाल में फंस जाता है।


गप्पी इंसाफ का आदर नहीं करता। वह दिलों को तोड़ता है, जिंदगियों को तबाह करता है। वह धूर्त और दुर्भावना से भरा होता है। वह असहाय और कमज़ोर इंसान को अपना शिकार बनाता है।


गप्प की रोकथाम मुश्किल होती है, क्योंकि उसकी न तो कोई शक्ल होती है, न ही नाम। गप्प लोगों की प्रतिष्ठा को आँच पहुँचाती है, सरकारों का तख्ता पलट देती है, वैवाहिक जीवन में दरार डाल देती है, कैरियर (career) बर्बाद कर देती है, निर्दोषों को रुलाती है, दिलों को चोट पहुँचाती है और नींद उड़ा देती है।


13. अपने वादे को वचनबद्धता में बदलिए (Turn Your Promises into Commitments)

वादा और वचनबद्धता (commitment) में क्या अंतर है?


वादा इरादे को जाहिर करता है। वचनबद्धता का मतलब यह होता है कि वादा हर हाल में निभाया जाएगा, चाहे कुछ भी हो। चाहे कुछ भी हो में मैं गैरकानूनी और अनैतिक बाते को शामिल नहीं है। वचनबद्धता चरित्र की देन होती है, और विश्वास को बढ़ाती है।


वचनबद्धता के बगैर रिश्ते खोखले होते हैं। ये सुविधा पर निर्भर होते हैं, और इसलिए थोड़े समय तक ही टिकते हैं। वचनबद्धता के बिना आज तक कोई स्थायी चीज नहीं रची जा सकी है।


वचनबद्धता कहती है, “अनजाने भविष्य में मैं स्थिर हूँ।" बहुत से लोग वचनबद्धता को बंध जाना समझने की भूल करते हैं। वास्तव में यह सच नहीं है। वचनबद्धता हमारी आजादी नहीं छीनती; वास्तव में यह हमको और आजादी देती है, क्योंकि इससे हम सुरक्षित महसूस करते हैं।


हमारी सबसे महत्त्वपूर्ण वचनबद्धता अपने मूल्यों के साथ होती हैं। इसीलिए यह ज़रूरी है कि हमारे मूल्य अच्छे हों। मिसाल के तौर पर, अगर मैं एक ऐसे नेता को समर्थन देने का वचन देता है, जो बाद में एक चरस-गाँजे का व्यापारी बन जाता है, तो क्या मुझे अपना वचन निभाना चाहिए? नहीं, बिल्कुल नहीं।


वचनबद्धता सुख और दुख में रिश्तों की मजबूती बनाए रखती है। यह इंसान की शख्सियत और रिश्तों में झलकती है।

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