सफ़लता के लिए कुदरत के नियम को समझे | What are the basic laws of nature for success

सफ़लता के लिए कुदरत का नियम

हमें सफलता पाने के लिए कुदरत के नियम(law of nature) को समझना जरूरी है। कुदरत(nature) का एक ही सिद्धांत है, वो है बदलाव।

हम आगे बढ़ रहे है या पीछे हट रहे है। हम काम बना रहे हैं या बिगाड़ रहे है। हमे अपने किसी भी काम के प्रति स्थायी नहीं रहना चाहिए।

अगर हम बीजों को बोयेंगे नहीं तो वे बीज पड़े पड़े सड़ जायेंगे। हम चाहे या ना चाहे कुदरत का नियम(law of nature) बदलाव का है और बदलाव होकर रहता है। इसलिए हमे समय के साथ बदलना जरूरी है।

सफलता बदलाव का ही परिणाम है। लेकिन इसका अर्थ ये नही की हर सफलता(success) का मतलब बदलाव ही है। हमे होने वाले बदलावों के बारे में जानना चाहिए और उन बदलावों को तब ही जीवन में उतारने चाहिए जब हमे ये बदलाव सही लगे।

किसी भी चीज को जाने परखें बिना लेना व्यक्ति के ढीले स्वभाव को दर्शाता है। ऐसा करना हमारे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की कमी को दर्शाता हैं।

परम्परा या रूढ़िवादी सोच के बारे में क्या कहा जा सकता है। केवल सफलता के लिए सफल होना एक नकारात्मक सोच है जो हमारे चारों ओर फेल रही है। हमे सही मायने में सफल होने के लिए सकारात्मक सोच(positive thinking) का होना बहुत जरूरी है।

हमारी सफलता हमारी किस्मत से नहीं खुलती है, बल्कि नियमो का पालन करने से खुलती है।

वजह और परिणाम का सिद्धांत

हमे सफल होने के लिए वजह या परिणाम के रिश्ते को समझना होगा। हर परिणाम की कोई ना कोई वजह जरूर होती है। वजह और परिणाम का सिद्धांत फसल बोने या काटने के समान ही है।

बोने और काटने का नियम

  1. हमे कुछ बोने की इच्छा होनी चाहिए। इच्छा हमारा शुरुआती बिंदु है।
  2. हम जैसे बीज बोयेंगे, वैसी ही फसल हमे मिलेगी। अगर हमने नीम के बीज बोए है तो आम का फल नहीं मिलेगा।
  3. किसी भी फसल को काटने से पहले बोना पड़ेगा। यानी की कुछ पाने से पहले हमे कुछ देना होगा। कुछ लोग हमेशा कुछ देने से पहले ही पाने की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं।
  4. जब हम फसल बोते है तो उससे कई गुना ज्यादा फसल काटते हैं। इसी तरह हम भी अगर हमारे दिमाग में सकारात्मक सोच के बीज बोयेंगे तो वह भी कई गुना बढ़कर हमे मिलेंगे। इसी तरह अगर हम अपने दिमाग में नकारात्मक सोच के बीज बोयेंगे तो वह भी हमे कई गुना बढ़कर मिलेंगे।
  5. खेती करने वाला किसान जानता है को वह जिस जिन बीज बोयेगा उसी दिन फसल नहीं काट सकता है। क्योंकि फसल तैयार होने में समय लगता है।
  6. हम काम बीज बोयेंगे तो कम फसल काटेंगे। इसी प्रकार हम ज्यादा बीज बोयेंगे तो ज्यादा फसल काटेंगे।

यह भौतिक विज्ञान के क्रिया प्रतिक्रिया के नियम के समान है। कई लोग हमेशा परिणाम बदलने की कोशिश करते है लेकिन उनकी वजह वही रहती है।

हमे अपने दिमाग में सकारात्मक सोच(positive thinking) भरनी चाहिए। नहीं तो नकारात्मकता उस खाली जगह को ले लेगी।

हमारा दिमाग एक बगीचे की तरह होता है। जिसमें हम जैसे बीज बोयेंगे वैसी ही हमे फसल मिलेगी। अच्छे बीज बोयेंगे तो बगीचा अच्छा होगा। अगर हम कुछ नहीं बोयेंगे तो वहा पर सिर्फ जंगली घास-फुस ही उगेगी। यही कुदरत का नियम(law of nature) है।

हमारी जिंदगी का सच भी यही है। जंगली घास-फुस तो अच्छे बीज बोयेंगे तो भी उगेगी लेकिन उसकी समय समय पर निराई गुड़ाई करना जरूरी है।
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