महान वैज्ञानिको के प्रेरक प्रसंग हिंदी में | Inspirational short story of great scientists in hindi

महान वैज्ञानिको के प्रेरक प्रसंग हिंदी में | Inspirational short story of great scientists in Hindi


1. कीर्ति-स्तंभ

प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने अपना सारा जीवन विज्ञान की सेवा में लगा दिया था। शुरू में पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना नहीं, परंतु सत्य कब तक छिपा रह सकता है!

जब सारे दुनिया ने उनकी प्रतिभा को जाना तो उनके अपने समय के महान् वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने उनकी प्रशंसा में कहा, “जगदीशचंद्र बसु ने विज्ञान से संबंधित जो नवीन बातें हमारे सामने रखी तथा जिन तथ्यों को उन्होंने बताया है, उनमें से किसी एक के लिए भी उनका कीर्ति-स्तंभ स्थापित किया जा सकता है।


2. बुद्धि और नींद

होमी जहाँगीर भाभा को बचपन में एक बड़ी विचित्र आदत थी। वह बहुत कम सोते थे। उन्हें नींद बहुत कम आती थी। इस बात से उनके माता-पिता काफी दुखी रहते थे । उन्होंने कई डॉक्टरों से बालक की जाँच करवायी। उन्हें डर था, कहीं नींद कम आने के कारण उनका स्वास्थ्य खराब न हो जाए।

अंत में उन्होंने एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक से चैकअप करवाया । डॉक्टर ने बताया कि बालक अत्यंत बुद्धिमान है । इसीलिए दिमाग हर समय कुछ न कुछ सोचता रहता है और नींद कम आती है। आगे चलकर यह बालक महान् वैज्ञानिक बना।


3. तल्लीनता

आइंस्टीन की पत्नी से पत्रकारों और वैज्ञानिकों ने एक बार आइंस्टीन के बारे में पूछा।

उनकी पत्नी ने सापेक्षता के सिद्धांत का किस्सा सुनाया– “एक दिन आइंस्टीन नाश्ते के लिए नीचे उतरे। उन्होंने कुछ नहीं खाया। मैंने समझा, तबीयत खराब होगी।

मैने पूछा, 'क्या आपकी तबीयत खराब है?

तो वह बोले, 'बड़े गजब का एक विचार आया है, और कॉफी पीने लगे, फिर वायलिन को छेड़ा, पर रुक गए। बार-बार विचार के बारे में बोलते, फिर रुक जाते। अंत में अध्ययन कक्ष में चले गए। करीब एक हफ्ते तक नीचे नहीं आए।

थके मॉदे हाथ मेज पर रखकर बोले, 'यह रहा वह ग्रेट आइडिया। और वही था उनका सापेक्षता का सिद्धांत।"


4. समान वेतन

महान् वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु सन् 1884 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर के पद पर नियुक्त थे। उस समय के अंग्रेजी शासन में भारतीयों के साथ बड़ा भेदभाव किया जाता था।

किसी भी भारतीय प्रोफेसर को यूरोपियन प्रोफेसर की तुलना में दो तिहाई वेतन दिया जाता था। इससे जगदीशचंद्र बसु दुखी हो गए। उन्होंने कहा, "समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए। मैं वेतन लूँगा तो पूरा, नहीं तो वेतन लूँगा ही नहीं ।" और उन्होंने पूरे तीन साल वेतन नहीं लिया था।

और पैसो कि कमी के कारण कलकत्ता का महँगा मकान छोड़कर उन्हें शहर से दूर एक सस्ता-सा मकान लेना पड़ा। कलकत्ता जाने के लिए वह पत्नी सहित स्वयं नाव लेकर हुगली नदी पार करते थे। पत्नी नाव लेकर वापस ले आती और शाम को बसु को लेने नाव लेकर फ़िर से जाती थी।

इसके बावजूद वह अपने निश्चय पर अड़े रहे। अंततः अंग्रेजों को हार माननी पड़ी और उन्हें यूरोपियन प्रोफेसरों के समान वेतन देना स्वीकार कर लिया गया था।


5. वफादारी

सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु के पिता भगवान चंद्र बसु डिप्टी मजिस्ट्रेट थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई चोरों और डाकुओं को जेल भेजा था। एक बार एक डाकू जेल से छूटकर उनके पास आया और काम माँगने लगा।

घर के सभी लोग डाकू को काम देने के खिलाफ थे, परंतु उन्होंने उस पर भरोसा कर उसे जगदीशचंद्र बसु को स्कूल ले जाने और वापस लाने का काम सौंप दिया था। उस डाकू ने कभी भी उनके भरोसे को टूटने नहीं दिया और हमेशा पूरी वफादारी से काम किया।


6. एक के बराबर

रामानुजन गणित के महान् विद्वान् थे। वह तीसरी कक्षा में थे। एक दिन अध्यापक कक्षा में गणित पढ़ा रहे थे- “जब किसी संख्या को उसी संख्या से भाग करते हैं, तो वह एक के बराबर हो जाती है।"

सभी विद्यार्थी समझ रहे थे, लेकिन रामानुजन को दुविधा महसूस हो रही थी। उन्होंने अध्यापक से पूछा, “जब हम शून्य को शून्य से भाग करेंगे, तो वह भी एक के बराबर ही होगा ?" इस प्रश्न का उत्तर अध्यापक के पास नहीं था। यही बच्चा बड़ा होकर गणित का महान् विद्वान् बना।


7. जीत

न्यूटन जब पढ़ते थे, तो उनकी कक्षा में एक शैतान लड़का भी था। वह कक्षा का सबसे बुद्धिमान लड़का था। पढ़ाई में वह हमेशा टॉप करता था। एक दिन न्यूटन का उस लड़के से झगड़ा हो गया । न्यूटन ने उसे हरा दिया।

सभी ने न्यूटन की तारीफ की, लेकिन न्यूटन ने मन में सोचा, अगर मै इस लड़के को पढ़ाई में भी पछाड़ दूँ, तभी मेरी सच्ची जीत होगी। उस दिन के बाद न्यूटन जी-जान से पढ़ाई में लग गए। और जव परीक्षा का परिणाम आया, तो न्यूटन के उस लड़के से भी ज्यादा नम्बर आए थे।


8. जहाँ मन चाहे

महान् वैज्ञानिक एडीसन को काम में जुटे रहने की आदत-सी पड़ गई थी। उन्हें काम का नशा इतना था कि वह जब प्रयोगशाला में घुस जाते थे, तो बाहर ही नहीं निकलते थे। उनकी पत्नी उनकी इस आदत से काफी परेशान थी।

एक दिन उसने उन्हें सलाह देते हुए कहा, “तुम लगातार काम करते रहते हो। कभी तो छुट्टी ले लिया करो।" "अच्छा, यह बताओ कि मैं छुट्टी लेकर जाऊँगा कहाँ ?" पत्नी ने चहकते हुए कहा, “कहीं भी, जहाँ तुम्हारा मन चाहे।” "अच्छा, तो मैं वहीं जाता हूँ।” इतना कहकर वह फिर प्रयोगशाला में घुस गए। उनकी पत्नी हक्की-बक्की रह गई।


9. प्रिय व्यक्ति

आइंस्टीन ने भौतिकी के बहुत सारे सिद्धांतों की खोज की थी। ये सारे सिद्धांत उच्च- स्तरीय गणित पर आधारित हैं। इसलिए आम व्यक्ति के लिए समझना कठिन है एक बार कुछ छात्र उनके पास गए और अनुरोध किया कि वे अपने सबसे चर्चित व महत्त्वपूर्ण सिद्धांत ‘सापेक्षिता' की कोई सरल व्याख्या बताएँ।

आइंस्टीन ने कहा, “अपने किसी अत्यंत प्रिय व्यक्ति के निकट घंटों बैठकर भी यही लगता है कि अभी तो कुछ ही मिनट हुए हैं। इसके विपरीत किसी अप्रिय व्यक्ति के साथ पाँच मिनट भी एक घंटे जितने लंबे लगते है। यही सापेक्षिता का सिद्धांत है।


10. जटिलता

अल्बर्ट आइंस्टीन एक ही साबुन से नहाने, कपड़े धोने और दाढ़ी बनाने का भी काम चला लेते थे । एक बार किसी ने इसका कारण जानना चाहा, तो उन्होंने कहा, "सीधी-सी बात है।

यदि आप साबुन के उपयोग जैसी छोटी-सी बात में भेदभाव करेंगे, तो आपके जीवन के अन्य कार्यो में भी भेदभाव और जटिलता आ जाएगी। मैं अपने जीवन को जटिल नहीं बनाना चाहता।"
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