Ego is The Enemy Book Summary in Hindi

आज हम इस लेख में हम आपको "Ego is The Enemy" की Book Summary बतायेंगे, जिसे Ryan Holiday ने लिखी है। जिसमे लेखक हमें ये बताते है की हमारा EGO हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है। और हमारा EGO हमारे व्यवहार को किस तरह दर्शाता है। आगे लेखक ये भी बताते है हम अपने EGO को अपना दुश्मन बनने के लिए कैसे रोक सकते है। जिससे हम अपने जीवन में सफल हो सके है। 

Ego is The Enemy Book Summary in Hindi

"EGO IS THE ENEMY" Book Summary in Hindi

इस दुनिया में रहने वाला कोई भी इंसान वो अपनी जिंदगी में इन्हीं मैं से किसी 3 स्टेज मैं से एक पर होगा।
  1. INSPIRE
  2. SUCCESS
  3. FAILURES
और यह तीनों स्टेज हमारी ज़िन्दगी में Repeat होते रहते है।

तो आइए इन तीनों STAGE के बारे में समझते है:-
  1. INSPIRE STAGE:- जब हम कुछ पाने तथा सीखने की स्थिति में हो।
  2. SUCCESS STAGE:- हमने जो चाहा था उसे पूरा कर लिया हो।
  3. FAILURE STAGE:- हम INSPIRE से SUCCESS तक पहुंचने में फेल हो जाए।
इन तीनों STAGE पर एक चीज जो हर वक्त हमारे साथ मौजूद रहती है वो है हमारा EGO और यही EGO हमारा सबसे बड़ा दुश्मन होता है।

जैसे गुस्सा और हंसी इंसान के चेहरे पर दिखती है। उसी तरह EGO भी इंसान की व्यवहार में दिख जाता है। आज तक जितने भी लोग अपने काम के दम पर दुनिया में लोकप्रिय हुए हैं। उनको आप देख लो जो आत्मविश्वासी ही जरूर होंगे। लेकिन EGO से भरे हुए कभी नहीं होंगे।

CONFIDENCE और EGO मैं बहुत बड़ा अंतर है। विनम्रता के बिना आत्मविश्वास घमंड है। पर अच्छी बात यह है कि इस EGO को हम कुछ टेक्निक्स के जरिए नियंत्रित कर सकते हैं। जिससे वो हमारे रास्ते में ना आए। और हम जो चाहे उसे पूरा कर पाए।

आइये अब हम हर एक STAGE के बारे में विस्तार से समझते है:-

Stage 1. -- Inspire Stage

ये वो STAGE है जब हम कुछ बड़े और अच्छे लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते है। जैसे कोई सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा होता है। या कोई अपना बिजनेस प्लान तैयार कर रहा होता है।

ये शुरुआती दौर सबसे मुश्किल होता है। क्योंकि किसी भी काम की शुरुआत में हम काफ़ी उत्साहित होते हैं, और थोड़ा बहुत बेचैन भी होते हैं। पर हम अपनी बेचैनी को छुपाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने लगते हैं और वो ही हमारा कमजोर पक्ष है।

बड़ी-बड़ी बातें करना बहुत आसान है। क्योंकि वास्तविक कार्य करने की बजाय हम सिर्फ बातें करके ही बहुत कम प्रयास से लोगों का ध्यान और प्रशंसा पा सकते हैं।

पर असली काम किए बिना सिर्फ बातें करके लोगों से तालियां और तारीफ सुनने की हमारी भूख ही हमारा EGO है। बातें तो सब कर सकते हैं। एक पागल भी किसी भी विषय पर कई घंटों तक बातें कर सकता है।

पर आज की दुनिया में जो दुर्लभ है वो शान्ति। ज्यादा बोलने से और ज्यादा सोचने से आपकी उर्जा कम होती है। और शुरू में ही ऊर्जा का कम हो जाने से आप काम शुरू नहीं कर सकते हैं।

और वैसे भी ज्यादा सोचने से आपका EGO काल्पनिक दर्शकों को तैयार करता है, जिससे आपको लगता है कि से लोग आपको ही देखते हैं और आपके बारे में ही सोचते हैं। पर हकीकत में ऐसा नहीं होता है।

यहां पर लेखक ने एक उदाहरण दिया है कि एक किशोर ने 1 सप्ताह के लिए क्लास छोड़ दी, क्योंकि कुछ दिनों पहले स्कूल के कैंटीन में उसके पेंट पर ज्यूस गिर गया था। जिससे वो शर्म के मारे स्कूल नहीं गया। क्योंकि उसके EGO ने एक काल्पनिक दर्शक बना लि की स्कूल मैं सब उसके बारे में ही सोचते होंगे और उनकी ही बातें करते होंगे।

लेकिन हकीकत तो ये थी कि स्कूल में दूसरे दिन किसी को इस घटना के बारे में याद भी नहीं था। इसीलिए याद रखिए कि आप को जितना लगता है, इतना लोग आपके बारे में नहीं सोचते हैं।

आज सोशल मीडिया और कई एप्स ने लोगो का ध्यान और काम पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कम कर दिया है।

फोर्ड कंपनी के फाउंडर हेनरी फोर्ड ने कहा था की आपकी प्रतिष्ठा आपने जो किया है उसके आधार पर बनती है। ना की आप जो करने वाले हो।

और वैसे भी आपकी प्रतिभा सिर्फ एक शुरुआती बिंदु है। आपने खुद देखा होगा कि कई लोग प्रतिभावान होने पर भी वह उस प्रतिभा से ज्यादा कुछ कर नहीं पाते हैं।

क्योंकि उनका EGO उन्हें किसी ना किसी तरह डरा के रोकने की कोशिश करता है। स्टीव जॉब्स कहते थे कि जब तक आप लोगों को दिखाओगे नहीं तब तक लोगों को पता ही नहीं चलेगा की उनको क्या चाहिए।

आपकी प्रतिभा भी एक उत्पाद की तरह है। जब तक आप अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने नहीं लाओगे, तब तक लोगों को पता नहीं चलेगा कि उन्हें ऐसा कि कुछ चाहिए।

अभी हम में से ज्यादातर लोग इंस्पायर स्टेज पर ही होंगे। तो हमारे EGO को नियंत्रित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है, हमारे काम पर ध्यान देना और अपने काम में सुधार करना।

BASKETBALL खिलाड़ी बिल ब्रैडली हर वक्त याद रखते थे कि जब आप अभ्यास नहीं कर रहे होते हैं, तब कहीं ना कहीं कोई ना कोई अभ्यास जरूर कर रहा होगा। और जब आप उनसे मिलोगे तो वो जीत जाएगा।

इसीलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने भी प्रतिभाशाली है। अगर आप आगे बढ़ना चाहते हो तो इंस्पायर स्टेज पर ही अपने EGO को इन दो तरीकों से नियंत्रित करना सीख लो।
  1. हमेंशा विद्यार्थी बन कर सीखते रहो।
  2. कम सोच के और अपने ACTIONS ज्यादा लेके अपने काम पर सतत् अभ्यास करके सीखते रहे। और अपने काम में सुधार करते रहें।

Stage 2. -- Success Stage

जब इंस्पायर स्टेज पर हम अपने EGO को नियंत्रित कर ले और अपने काम पर ध्यान दें। तो निश्चित रूप से हमें सक्सेस या सफ़लता मिलेगी।

सफ़लता मिलने से हमारी ताक़त बढ़ती हैं। और जिस तरह सफ़लता मिलने से हमारी ताक़त बढ़ती है, उसी तरह हमारा EGO भी बड़ा होता है। इसलिए वो हमे दूसरे तरीकों से पीछे धकेलने की कोशिश करेगा।

सफलता मिलने पर हमारे जीवन में कई उतार-चढ़ाव आएंगे। जैसे इंटरव्यू, अवॉर्ड फंक्शन, REPORTERS, PARTY, यही सब उतार-चढ़ाव आपको अपने काम से दूर ले जाने की कोशिश करेंगे।

जो हमारे EGO को बहुत पसंद है। क्योंकि आपको लोगों की प्रशंसा मिलेगी ये बात आपको हमेशा याद रखनी चाहिए जिसके कारण आज यह सब आप देख पा रहे हैं। क्योंकि वही आपका असली मूल्य है। अपने बुनियादी मूल्यों और काम से दूर रहकर क्या परिणाम आ सकते हैं। वो आप विजय माल्या जैसे लोगों से सीख सकते हो।

दुनिया के लोकप्रिय योद्धा और मुगल साम्राज्य के चंगेज खान अपने बेटों से कहते थे कि यदि तुम अपने ईगो को निगल नहीं सकते तो तुम अच्छा नेतृत्व नहीं कर पाओगे।

वो कहते थे कि दुनिया का कितना भी बड़ा ऊंचे से ऊंचा पहाड़ क्यों ना हो, उस पर रहने वाला जानवर जब उस पहाड़ की चोटी पर खड़ा हो जाए तो वह जानवर उस पहाड़ से तो अच्छा ही होता है।

जैसे सफलता पाना मुश्किल है, वैसे ही उस चोटी पर टिक पाना मुश्किल है। इसीलिए हमें हमेशा अपनी पहचान चोटी रखनी चाहिए। और एक विद्यार्थी की तरह सीखते और बदलाव करते रहने चाहिए।

लेखक कहते हैं कि जब भी कोई कंपनी या ENTREPRENEUR से पूछा जाता है कि क्या करने वाले हो तो वह कहते हैं कि हम दुनिया को बदलने वाले हैं। जो सही भी है।

पर दुनिया में अभी जिन कंपनियों ने दुनिया को बदल दिया है। वह कंपनी अपनी बुनियादी मूल्य और ग्राहक केंद्रित निष्पादन से शुरू हुई थी। जैसे यूट्यूब टीवी की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि मनोरंजन करने के लिए बनाया गया था।

पर आज इनका जो ग्रोथ है वो इनके विजन की वजह से नहीं बल्कि अपनी पहचान को छोटी रखकर उसमें धीरे धीरे चोटे चोटे परिवर्तन करके ही दुनिया की नंबर वन वीडियो साइट बनाया है।

इसमें कोई शक नहीं है कि आप बड़ा सोचे पर उसे पाने के लिए अपनी पहचान छोटी रखे और विस्तृत रूप से छोटे छोटे कदम ले ओर उसे प्लानिंग के साथ निष्पादित (EXECUTE) करे। जिससे आपका वो सपना सपना ना रहे बल्कि हकीकत मे बदल जाए।

अपनी पहचान छोटी रखने का मतलब है, अपने आप को बढ़ा चढ़ा कर नहीं बताना। अगर आप किसी कंपनी में रिसेप्शनिस्ट हो और कोई पूछे तो उसके प्रशासनिक अधिकारी हो ये कहने कि बजाय आप उसे ये कहे कि आप एक रिसेप्शनिस्ट हो, ये कहे।

जिससे आप छोटे स्तर पर रहकर दूसरों से सीख पाओगे। तथा अपने काम में और सुधार लेकर आ सकते हो।

जेम फिलोसोफार ज्युगान अपने आप से कहते थे कि मास्टर तुम सोभर बने रहो, अपनी प्रसिद्धि और अपने पास पड़े धन से कभी भी धोखा मत खाओ। बस जिस चीज के लिए तुम जाने गए हो वो चीज करते ही जाओ।

रायन हॉलिडे कहते है जो वास्तव में सफ़ल लोग है वो साधारण जीवन जीते है, साधारण कपड़े पहनते है। इसका मतलब ये नहीं है कि उनको अमीरों वाली जिंदगी जीना नहीं आता। पर वे साधारण रहकर बुनियादी मूल्य ओर अपने मानक व्यवहार को ज्यादा महत्व देते हैं।

मोहम्मद अली कहते थे जब आप मेरे जितने बड़े ओर महान होंगे तब विनम्र बने रहना बहुत मुश्किल है। क्योंकि वो मानते थे कि आज कि दुनिया में आत्मविश्वास, कला, और होशियार होने से भी इंसानों में जो चीज सबसे कम है, वो है आत्म जागरूकता।

इसलिए जब भी आपको सफ़लता मिले उसे बरकरार रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है विनम्र बने रहना। ख्वाबों को दुनिया में खुद कि कहानी गुनगुनाने कि बजाय अपना मुख्य काम करते रहे। क्योंकि सफ़लता मिलने पर इवेंट्स, कैमरा, सुर्खियां इन्सान को ज्यादा आकर्षित करती हैं। ओर अपने मुख्य काम से दूर लेकर जाती है।

Stage 3. -- Failures

इस किताब का अंतिम भाग है FAILURES, कोई भी काम में फ़ैल होना आम बात है। अपने EGO को नियंत्रण में रखने के बावजूद भी हम फ़ैल हो सकते है। पर उस FAILURE टाइम में हम क्या करते है, वो ही सबसे जरूरी है।

DETROIT TRAD नाम के लड़के को दस साल के लिए जेल में डाल दिया गया क्योंकि उनके ऊपर चोरी, स्मगलिंग, ड्रग्स, हथियारों की हेरा फेरी ओर खून के आरोप थे।

वो ना तो किसी को मारने से डरता था, और नाही खुद मरने से। उनके पास उनकी खुद कि गेंग भी थी, जों ये सब काम करती थी।

जब उसे जेल में डाल दिया गया तो उसने आम कैदियों को तरह बैठे रहने कि बजाय जेल में ही सीखना शुरू किया। क्योंकि चाहे वो कुछ भी क्यू ना कर ले वो वहा से निकल नहीं सकता था।

इसलिए उसने समझदारी से जों कर सकता था, वो किया। जेल के पुस्तकालय में ही उसने धार्मिक इतिहास, फिलोसोफी के ऊपर कई सारी किताबें पढ़ी। उसने तो डिक्शनरी भी अपने हाथों से कवर तो कवर लिखना शुरू किया।

जिससे उसने कई सारे नए शब्द सीखे। और जब तक वो जेल में रहा तब तक उसने खाली समय में हमेशा पढ़ने से कुछ ना कुछ नया सीखा। इस समय का सही इस्तेमाल करने के कारण ही वो लड़का आगे जाके अमेरिकन मंत्री ओर समाजसेवी बना।

जिन्हें लोग बाद ने मालकम एक्स के नाम से जानने लगे। जो अमेरिका में कई मानवाधिकार के लिए लड़े थे।

हमारे जीवन में दो ही तरह का समय होता है। अलाइव टाइम या डेड टाइम

ALIVE TIME मतलब जब आप सीखते हो, या अपने हर एक सेकंड को अच्छे कामों में लगाते हो।

DEAD TIME मतलब जब आप दूसरों के ऊपर आरोप लगाते हो, ओर कुछ किए बिना ही किस्मत के भरोसे बैठे रहते हो।

मालकम एक्स ने जेल में बिताए हर एक सेकंड को किताबें पढ़ अपने समय को ALIVE TIME बना दिया। जब रिपोटर्स उनकी कालेज के बारे में पूछते थे तो वो जेल को ही अपनी कॉलेज बताते थे।

क्योंकि वही से उनमें बदलाव आया था। इस तरह हमारे पास भी हर वक्त दो विकल्प होते है कि हम कोनसा समय पसंद करते हैं ALIVE TIME या DEAD TIME।

इन्तजार करना भी एक DEAD TIME हैं। हमेशा कुछ ना कुछ सीखते रहना ALIVE TIME हैं।

जब आप बार बार फ़ैल हो रहे हो तो अपने समय को ALIVE TIME बनाओ। ओर हमेशा मेहनत करते रहो, आप जरूर सफल होंगे।

RYAN HOLIDAY का मानना है कि कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते है जो अपना बेहतर प्रदर्शन देने के बाद भी लोगो की तालियां सुनने के लिए नहीं रुकते है। क्योंकि वो जानते है ये तालियां स्टेडियम के बीच खेलने से नहीं जब सब मजे कर रहे थे, तब लोगो की प्रसंशा की परवाह किए बिना ही अकेले की हुईं मेहनत से आईं है।

RYAN HOLIDAY अभ्यास को फर्श कि सफाई से तुलना करते है कि एक बार फर्श सफा करने से हमेशा साफ नहीं रहता है। उस पर हर रोज धूल जमेगी ही इसलिए उसे साफ करने के लिए रोजाना सफाई करनी ही पड़ेगी।

वही चीज आपकी प्रतिभा के साथ भी है, कि सिर्फ एक बार अभ्यास करने से ही कुछ नहीं होने वाला है। उस प्रतिभा को चमकाने के लिए आपको रोजाना फर्श कि तरह सफाई करनी पड़ेगी। अभ्यास के जरिए अपनी प्रतिभा को चमकाना पड़ेगा। नहीं तो उस पर जंग लग जाएगा।

"EGO IS THE ENEMY बहुत ही बढ़िया किताब है, जों एक लीडर, एथलीट, एंटरप्रेन्योर, डिजाइनर, ओर हर एक उस रचनात्मक व्यक्ति है जो इस 21 सदी में दूसरों से अलग बन के आगे बढ़ना चाहता है। उसे यह किताब एक बार जरूर पढ़नी चाहिए।
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