खुश रहने का रहस्य | Best Motivation Story in Hindi - MotivationHindi

बहुत समय पहले  बात हैं, एक गांव में एक बहुत ज्ञानी महात्मा रहते थे। आसपास के कई गावों के लोग अपनी परेशानिया और समस्याओं के हल के लिए उन महात्मा के पास आते थे। और वो महात्मा उन लोगों की परेशानियों और समस्याओं को दूर करने में उनकी मदद करते थे।


खुश रहने का रहस्य | Best Motivation Story in Hindi - MotivationHindi


एक दिन उन महात्मा के पास एक व्यक्ति आया और पुछा की - गुरूजी, इस संसार में खुश  रहने का रहस्य क्या है?


उसके बाद उन महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा की तुम मेरे साथ जंगल में चलो, में तुम्हे खुश रहने का रहस्य बताऊंगा। उसके बाद महात्मा और वो व्यक्ति दोनों ने जंगल की तरफ चलना शुरू किया। रास्ते में चलते हुए उन महात्मा ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उसे उस व्यक्ति को देते हुए कहा की इसे पकड़ो और मेरे साथ चलते रहो। उस व्यक्ति ने वो पत्थर उठाया और महात्मा के साथ चलने लगा।


कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथों में दर्द होने लगा लेकिन फिर भी वो उन महात्मा के साथ चुपचाप चलता रहा। जब चलते चलते काफी समय गुजर गया और उस व्यक्ति को अब दर्द सहा नहीं गया तो उस व्यक्ति ने महात्मा से कहा की बहुत दर्द हो रहा है। महात्मा ने उस व्यक्ति से कहा तुम पत्थर को नीचे रख दो, जैसे ही उस व्यक्ति  पत्थर नीचे रखा उस व्यक्ति को राहत मिली।


तब महात्मा ने उस व्यक्ति से पूछा - जब तुमने पत्थर को अपने हाथो में उठा रखा था, तो तुम्हे कैसा महसुस हो रहा था। तब उस व्यक्ति ने कहा - शुरू शुरू में दर्द कम था, तो मेरा ध्यान आप पर ज्यादा और पत्थर पर काम था। लेकिन जैसे जैसे दर्द बढ़ता गया वैसे वैसे मेरा ध्यान आप पर कम और पत्थर पर ज्यादा होने लगा था। और एक समय ऐसा आया की मेरा पूरा ध्यान सिर्फ पत्थर पर था। और इससे अलग में कुछ नहीं सोच पा रहा था।


तब महात्मा ने उससे फिर पूछा - जब तुमने पत्थर को नीचे रखा तब तुम्हे कैसा महसूस हुआ।


इस पर उस व्यक्ति ने कहा - जब मैंने पत्थर नीचे रखा तब मुझे बड़ी राहत महसूस हुई और बहुत ख़ुशी हुई।


तब महात्मा कहा - यही है खुश रहने का रहस्य।


इस पर वो व्यक्ति बोला - गुरूजी में कुछ समझा नहीं।


तब महात्मा ने उसे समझाते हुए कहा - जिस तरह इस पत्थर को थोड़ी देर तुमने हाथ में उठाये रखा तुम्हे थोडा सा दर्द हुआ। थोड़ी ज्यादा देर उठाये रखा तो तुम्हे ज्यादा दर्द हुआ। अगर हम इसे थोड़ी और ज्यादा देर तक उठाये रखेंगे तो दर्द भी बढ़ता जायेगा। उसी तरह हम दुखो के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे तो हम उतने ही दुखी और निराश रहेंगे। यह हम पर निर्भर करता है की हम इस दुखो के बोझ को थोड़ी सी देर उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर उठाये रखते है 


इसलिए अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो अपने दुःख रूपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सिख लो और अगर हो सके तो उसे उठाओ ही मत।


इस कहानी की की शिक्षा || Moral of Motivation Story in Hindi

यदि हम ने अपने दुःख रूपी पत्थर को उठा रखा है तो शुरू शुरू में हमारा ध्यान अपने लक्ष्य पर ज्यादा तथा दुखो पर कम होगा। लेकिन अगर हमने अपने दुःख रूपी पत्थर को लम्बे समय से उठा रखा है तो हमारा ध्यान अपने लक्ष्य से हटकर हमारे दुखो पर आ जायेगा। और तब हम अपने दुखो के अलावा कुछ नहीं सोच पाएंगे और अपने ही दुखो में डूबकर परेशां होते रहेंगे और कभी भी खुस नहीं रह पाएंगे।


इसलिए अगर आपने भी कोई दुःख रूपी पत्थर उठा रखा है तो उसे जल्दी से जल्दी नीचे रखिये यानि की अपने दुखो को, तनाव को अपने दिल और दिमाग से निकाल कर फेक दे। और खुश रहे तथा अपने लक्ष्य पर काम करे।



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