संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानियां || Real Life Inspirational Short Stories in Hindi

हमारी सफलता हमारी सोच पर निर्भर करती है। हमारी सफलता जिन्दगी हमारी जिन्दगी में बहुत मायने रखती है। अगर आपको अपनी जिन्दगी में कुछ बड़ा करना है, तो आपको अपनी सोच बदलनी होगी। अब ये आपकी या हमारी सोच पर निर्भर करता है की हम या आप अपनी जिन्दगी कैसे बदल सकते है।

हमे हमारे पास कई सारे बुद्धिमान लोग दिखते है। कुछ लोग इतने प्रतिभाशाली होते है की वो अपनी सोच के आधार पर दुनिया को बदलने का दम रखते है। ऐसे लोगों को जब आप देखते हो या मिलते हो तो हमें एक अलग ही Inspiration मिलती है।

इस दुनिया में कई लोग ऐसे भी है, जिन्होंने हर असम्भव काम को भी सम्भव करके दिखाया है। इन्ही लोगों ने बताया है की इस दुनिया में आप इंसान भी बड़ा बन सकता है। और अपने सपनों को पूरा कर सकता है। ऐसे काम करने वालो को ही फिर पुरी दुनिया सम्मान करती है।

आज हम इस पोस्ट महान लोगो के बारे में बतायेंगे की कैसे संघर्ष करके सफलता को हासिल किया है। आज हम Real Life Inspirational Short Stories बतायेंगे, जिसे पढ़कर आपको Inspiration जरुर मिलेगी।

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानियां
Real-Life Inspirational Short Stories in Hindi

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानियां || Real Life Inspirational Short Stories in Hindi

1. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalaam) - मिशाइल मैन 

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जिन्हें दुनिया आज "मिशाइल मैन" के नाम से भी जानती है। डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के पिताजी ज्यादा पढ़े लिखे नही थे और ना ही ज्यादा अमीर थे। इनके पिताजी मछुआरों को नावं किराये पर देते थे।

इनका शुरआती जीवन बड़ी कठिनाइयों में बिता। इनको अपनी पढाई करने के लिए अख़बार तक बेचने पड़े थे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बचपन से ही पढाई के प्रति लगाव था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मेहनती और अनुशासन प्रिय थे।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक महान वेज्ञानिक थे। इनके कई सफल प्रयोगों से भारत का विश्व में नाम हुआ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राजनीती से दूर रहकर भी देश के सबसे पड़े पद पर आसीन रहे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक होने के साथ साथ एक गंभीर समाज चिन्तक और अच्छे इंसान भी थे।

2. डॉ. भीमराव जी अम्बेडकर (Dr. B. R. Ambedkar) - बाबा साहेब

डॉ. भीमराव जी आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। इनका पूरा नाम भीमराव राम जी आंबेडकर था। तथा ये "बाबासाहब" के नाम से लोकप्रिय थे। सामाजिक भेदभाव, श्रमिकों, किसानों, और माहिलाओ के अधिकारों का समर्थन किया था। ये स्वतंत्र भारत के न्यायमंत्री रहे तथा भारतीय सविधान के निर्माता में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इनको अपनी जाती के कारण सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। डॉ. भीमराव अम्बेडकर पढाई में होनहार छात्र होने के बावजुद इनको कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने कोलंबिया विश्व विद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से स्नातकोतर का अध्धयन किया। इन्होंने जातिगत तथा छुआछूत के विरुद्ध आन्दोलन किया था। डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजनीती के छेत्र में विभिन्न पदों पर रहे।

भारत की स्वतंत्रता के बाद डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री रहें थे। डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक बुद्धिमान सविधान विशेषज्ञ थे तथा उन्होंने लगभग 60 देशों के सविधानो का अध्धयन किया। और भारत के सविधान के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।

3. दशरथ मांझी (Dashrath Manjhi) - माउंटेन मैन

दशरथ मांझी का जन्म 14 जनवरी 1929 को बिहार गया में हुआ था। वह एक गरीब मजदुर थे। दशरथ मांझी बेहद पिछड़े इलाके से आते थे। वे जिस गावं में रहते थे, उससे किसी दुसरे गावं या पास के कस्बे में जाने के लिए एक बहुत बड़ा पहाड़ (गह्लोर पर्वत) पार करना पड़ता था।

उनके गावं में बिजली, पानी की व्यवस्था भी नही थी। और हर छोटी छोटी जरुरत के लिए पहाड़ पार करना पड़ता था या उसका चक्कर लगा कर जाना पड़ता था। दशरथ मांझी के गावं की एक ओरत अपने पति के लिए खाना ले जा रही थी और वो पहाड़ को पार करते करते पहाड़ के दर्रे में गिर गयी और उसकी वही मृत्यु हो गयी। यह बात दशरथ मांझी को सुभ गयी और उनके ऊपर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने जुनून सवार हो गया।

उसके बाद दशरथ मांझी रोज सुबह चेनी हथोड़ी लेकर उस पहाड़ पर पहुच जाते थे। जैसे उनको इस काम के लिए पैसे मिल रहे हो। सब लोग उन्हें पागल और संकी कहते थे। लेकिन वो किसी की नही सुनते, बस अपना काम करते रहे। उन्होंने 360 फीट लम्बे, 30 फीट चोडे, 25 फीट ऊचें पहाड़ को दशरथ मांझी तोड़ने में सफल हो जाते है। उनको ये पहाड़ तोड़ने में 22 साल लगे। और उन्होंने 55 किलोमीटर के रास्ते को 15 किलोमीटर के रास्ते में बदल दिया।

4. सुधा चन्द्रन (Sudha Chandran) 

सुधा चंद्रन का जन्म 21 सितम्बर 1964 को हुआ था। जब वो 3 साल की थी, इनको डांस करने में बहुत रूचि होने लगी थी। जब ये 3 साल की थी तब इन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य सिखना शुरू किया था। सुधा चंद्रन जी ने 16 साल की उम्र तक कई स्टेज शो किये भरतनाट्यम कलाकार के रूप में शोहरत हासिल कर ली थी।

एक दिन सुधा चंद्रन एक बस दुर्घटना में उनका पैर बुरी तरह जख्मी हो गया था। उसके बाद अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरो ने बताया की सुधा जी के दाहिने पैर में संक्रमण फेल गया है। और दुर्भाग्यवश उनका पैर काटना पड़ा। और उस पैर की जगह कृत्रिम पैर लगाया था।

अब उनको लगने लगा की उनका भविष्य पूरी तरह अंधकार में चला गया है। लेकिन जिन लोगो में आत्मविश्वास तथा कुछ कर गुजरने की चाह हो तो वो लोग बड़ी से बड़ी मुश्किल से बहार आ जाते है। सुधा जी ने भी हार नही मानीं और नृत्य को फिर से अपना लक्ष्य बनाया।

उसके बाद सुधा जी ने अपने कृत्रिम पैर से ही नृत्य करना फिर से शुरू किया। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद उनको फिर से नृत्य करने का मोका मिला और उन्होंने अपने कृत्रिम पेरो से स्टेज पर नृत्य किया। नृत्य ख़त्म होते ही उस पुरे सभागार में बहुत देर तक तालियों की गुंज रही। और लोगो के लिए प्रेरणा बन गयी।

5. नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte)

नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म 15 अगस्त 1769 को फ्रांस के कोर्सिका द्वीप पर हुआ था। नेपोलियन बोनापार्ट के पिताजी चार्ल्स बोनापार्ट फ्रांस के राज दरबार में कोर्सिका का प्रतिनिधित्व करते थे। इनका जन्म एक सुख समर्द्ध परिवार में होने के कारण इनका बचपन काफ़ी सुखद गुजरा था। उनकों बचपन से काफी अच्छी शिक्षा मिली थी।

नेपोलियन बचपन से ही वीरों की कहानियाँ सुना करते थे। इस वजह से उनमें योद्धा की प्रवर्ती का विकास हुआ। उसके बाद उसके पिता ने उसे सेनिक स्कूल में भर्ती करवा दिया। उसके बाद उनको फ्रांस के राजकीय तोपखाने में नोकरी मिल गयी। उनके पिता की मृत्यु हो जाने के बाद उन्होंने अपने 7 भाई बहनों का पालन पोषण किया।

नेपोलियन ने 1792 में टूलों का विद्रोह सफलतापूर्वक दबाया, और 1796 में इटली के राज्यों को जीत कर अपनी योग्यता का परिचय दिया। उसके बाद उनकी लोकप्रियता और शक्ति फ्रांस में बढ़ने लगी। उसके बाद 1804 में फ्रांस के सम्राट बन गए। उसके बाद 1805 और 1806 में आस्ट्रिया, रूस, और प्रशा को पराजित करके लगभग पुरे यूरोप पर अपना आधिपत्य जमा दिया।

नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक ऐसा महान बादशाह बना जिसने अपनी जिन्दगी में कभी हारना नहीं सिखा था। उनके मजबूत इरादे और अटूट द्रढ़संकल्प के साथ दुनिया के एक बहुत बड़े हिस्से को जीत कर विश्व को अपनी बहादुरी और ताकत का परिचय दिया था।

6. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekanand)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। सन्यास धारण करने से पहले इनका नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। स्वामी विवेकानंद के पिताजी का नाम विश्वनाथ दत्त था। और इनके माताजी का नाम भुनेश्वरी देवी था। स्वामी विवेकानंद के पिताजी विश्वनाथ दत्त कलकत्ता के उच्च न्यायालय में वकालत करते थे।

स्वामी विवेकानंद की बुद्धि बचपन से तेज थी, और वो परमात्मा और आध्यात्म का ध्यान किया करते थे। स्वामी विवेकानन्द अपने धार्मिक और आध्यात्मिक संशय को निवारण के लिए कई लोगो से मिले लेकिन कही भी उनकी शंकाओ का समाधान नही मिला। एक दिन उनके किसी सम्बन्धी उनको रामकृष्ण परमहंस के पास ले गए। वहा पर उनको अपनी शंकाओ का समाधान मिला और फिर उनके शिष्य बन गए।

स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस से बड़े प्रभावित हुए और वह पर उन्होंने सिखा की सारे जीवों में स्वयं परमात्मा का अस्तित्व है, तथा जो व्यक्ति दुसरे जरुरतमंदों की सेवा करता है वो परमात्मा की सेवा करता है। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद उन्होंने पुरे भारत का भ्रमण किया। स्वामी विवेकानंद ने 1893 अमेरिका स्थित शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की और से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।

स्वामी विवेकानंद वेदान्त के विख्यात आध्यात्मिक गुरु थे। स्वामी विवेकानंद ने भारत के वेदान्त का ज्ञान पुरे अमेरिका और युरोप तक पहुचाया। स्वामी विवेकानंद भाईचारे और एकता को महत्व देते थे, इसलिए उन्होंने हर एक इंसान को अलग नजरिये से देखने की सिख ली थी। स्वामी विवेकानंद ने अपनी रचनाओ के माध्यम से भारत के साहित्य को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई तथा लोगों को सांस्कृतिक भावनाओं के जरिये भी जोड़ने की कोशिश की थी।

7. शाहरुख़ खान (Sharukh Khan)

शाहरुख़ खान का जन्म 2 नवम्बर 1965 को हुआ था। शाहरुख़ खान को हम SRK के नाम से भी जानते है। शाहरुख़ खान को और भी कई नामों से जाना जाता है, जैसे- किंग खान, रोमांस किंग, बॉलीवुड का बादशाह, किंग ऑफ़ बॉलीवुड आदि। शाहरुख़ खान अब तक 72 से ज्यादा फिल्मो में काम कर चुके है।

शाहरुख़ खान के करियर की शुरुआत टेलीविजन से हुई। शाहरुख़ खान ने दिल दरिया, फ़ोजी, सर्कस, जैसे कई सीरियल में काम किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। शाहरुख़ खान के फ़िल्मी करियर की शुरुआत फिल्म "दीवाना" से हुई, जिसके लिए उनको फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। शाहरुख़ खान की यह फिल्म उस समय की सुपरहिट फिल्म रही थी। उसके बाद शाहरुख़ खान ने कई फिल्मे की और लोगो की पसंद बनते गए। शाहरुख़ खान अपनी रोमेंटिक फिल्मो के कारण काफी लोकप्रिय हुए।

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